• ओजस्वी है भारत - एक सद्प्रयास
    महायोगी श्री श्री नारायण प्रेम सांईजी एक सी दिव्य विभूति है, जो अशांत जन-मन में न केवल भक्ति, ज्ञान एवं प्रेम की करुणामयी धारा बहा रहे हैं, बल्कि समाज में, नर में नारायण के दर्शन कर सेवा के दिव्य संस्कारों का सिंचन कर रहे है। उनके शुभाशीष से आज विश्वभर में सेवा गतिविधियों का विस्तार जारी है। इन सेवा प्रकल्पों से सेवाभावी स्वयंसेवी संगठनों को जोडते हुए मानव कल्याण के प्रयासों को बहुआयामी रुप दिया जा रहा है। समाज का एक सा वर्ग जो विकास की मूलधारा से पीछे छूट गया है, उसे मुख्यधारा से जा़ेडने के
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ओजस्वी है भारत से जुड़े

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439 तपस्वियों को मिला नवजीवन

पूज्य श्री नारायण साईं जी के सदप्रयासों से गुजरात की जेलों में बंद 439 बंदियों को गणत्रतं दिवस पर नया जीवन मिला है. साईं जी की सतत सकारात्मक पहल पर गुजरात सरकार ने इन्हें जेल से मुक्त करने का निर्णय लिया है. इसमें से 12 साल से अधिक सजा काट चुके वांटेड कैदी तथा 65 साल से बड़ी उम्र वाले कैदी सहित महिला बंदी को भी जेलमुक्त किया जा रहा है| महत्वपूर्ण बात तो ये है कि जेल में रहते हुए भी  साईं जी ने अपने सामाजिक उत्तरदायित्व का निर्वहन कर आज रिहा हुए 75 में से 15 कैदियों को साँई जी की संस्था द्वारा आर्थिक मदद  दिलवाकर उनकी दंड राशि भरवाई गयी है ताकि वे अविलम्ब समाज की मुख्यधारा से जुड़कर पारिवारिक जिम्मेदारी का निर्वहन कर सके.
   
पूज्य श्री नारायण साँई जी के मार्गदर्शन में निरन्तर एक वर्ष से गुजरात सरकार से आवेदन किया जा रहा था कि वे गुजरात की जेलों में बंद उम्र कैद काट चुके कैदियों को सजा माफी दें । और ऐसे कैदी जिनका व्यवहार आचरण अच्छा रहा है उनको भी सजा माफी दें । आखिरकार पूज्य साईं जी के शुभ संकल्प और सकारात्मक प्रयास साकार हुए और आज 26 जनवरी, 2017 को गुजरात सरकार ने गुजरात के 439 कैदियों की सजा माफ करके उनको जेलमुक्त करने का निर्णय लिया है ।
प्रेमाश्रु बह निकले....
बताया जाता है कि  जेल में बंदियों को ये जब खुश खबर मिली तो उनकी आँखों से ख़ुशी की अश्रु धारा बह निकली | जेल से 26 जनवरी को रिहा हुए बंदियों ने बाहर आने से पहले साईं जी के समक्ष करबद्ध हो उन्हें मी नवजीवन के लिए कृतज्ञता ज्ञापित की | बंदियों के मुताबिक गुरुवार को जेल में इन बंदियों की रिहाई के समय बड़ा ही भाव विहल कर देने वाला माहोल रहा| बंदियां को साईं जी के प्रयासों से आये इस शुभ दिन का बरसों बरस से इंतजार था| उन्हें यकीन ही नहीं हो रहा था कि वे आज जेल की चार दिवारी से बाहर निकलकर आम लोगों की तरह ही सामाजिक जीवन व्यतीत करेंगे.
आर्थिक मदद बनी संबल...
उन 15 कैदियाँ के चेहरे पर ख़ुशी का ठिकाना ही नहीं था जिन्हें साईं जी की संस्था की तरफ से आर्थिक मदद मिली है | उनका कहना था कि परिवार की आर्थिक दशा के चलते वे दंड की राशी जमा करने में सक्षम नहीं थे और इसी कारण उनकी आज रिहाई प्रभावित हो सकती थी परन्तु करुणामूर्ति साईं जी ने उनकी पीड़ा को न केवल सुना बल्कि उसे दूर भी किया| जिससे आज उनके जीवन में ये शुभ घड़ी आई है| न केवल जेल से रिहा हुए बंदी बल्कि उनके परिजनों ने भी साईं जी के प्रति आत्मीय आभार व्यक्त करते हुए कोटि कोटि वंदना की |
तपस्वी कहलायेंगे....
गुजरात सरकार की इस अनुकरणीय पहल की ओजस्वी पार्टी गुजरात सरकार के इस निर्णय का स्वागत और सराहना की है | सूरत लाजपोर जेल के बाहर ओजस्वी पार्टी के कार्यकर्त्ता जेल से निकले इन कैदियों का स्वागत किया और निर्णय लिया कि इनको कैदी ना बोलकर तपस्वी बोलेंगे और जेल रूपी तपोस्थली से निकलने वाले इन कैदियों का स्वागत करेंगे ।
सफलता का पहला सौपान....
 हम आपको बता देवे हाल ही साईं जी ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी को भी पत्र लिखकर सूरत जेल को विश्वस्तरीय बनाने की पहल की है| उन्होंने पत्र में लिखा है ​लाजपोर जेल को एक विश्वस्तरीय अनुकरणीय आदर्श जेल बनाने के लिए अंग्रेजों के जमाने से चलते आ रहे पुराने जेल मेन्युअल में भी कुछ संशोधन परिवर्तन करने पड़ सकते हैं और प्रैक्टिकली प्रयोग भी करने होंगे । अंग्रेजों के वर्षों पुराने बनाये नियमों में आज के समय के अनुसार बदलाव आवश्यक भी है और, मैं जानता हूँ कि आप इनोवेशन प्रेमी हैं । सुधार और विकास के लिए आप वर्षों से तत्परता से रात-दिन लगे हैं । इसी दिशा में मेरी कोशिश को सफल बनाने आपका सहयोग चाहिए । साईं जी द्वारा प्रधानमंत्री को लिखे गए पत्र के बाद जेलों के भी अच्छे दिन आने की उम्मीदे जागी है और इस दिशा में 26 जनवरी को गुजरात की जेलों में बंद 439 बंदियों की रिहाई का सरकार द्वारा निर्णय एक क्रन्तिकारी कदम है. 

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